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गोवर्धन पूजा आज, जानें क्या है महत्व? और पूजन की सही विधि

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Govardhan Parvat Vrat Katha Puja Vidhi Aur Mahatv
दिवाली या दीपावली जो की हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है उसके अगले दिन कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा को गोवर्धन पूजा का त्यौहार समस्त उत्तर भारत में श्रद्धा से मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है की इस  पूजा की शुरुआत श्री कृष्ण भगवान ने की थी. इस त्यौहार को प्रकृति और समाज दोनों की पूजा की जाती है. प्रकृति के रूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है और समाज के आधार के रूप में गाय अर्थात गौ की पूजा होती है.

इस त्यौहार को मानाने का ढंग भी बड़ा निराला है इस त्योहार में घर के मुख्यद्वार पर गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाए जाते हैं और ठाकुर जी अर्थात श्री कृष्णा भगवन को अन्नकूट का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि इस पर्व को मनाने से लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है। दरिद्रता का नाश होता है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन प्रसन्न रहकर भगवान श्रीकृष्‍ण को प्रिय अन्नकूट उत्सव को भक्तिपूर्वक मनाना चाहिए। मान्यता है कि द्वापर युग से इस त्योहार का आरंभ हुआ। 

भगवान् को चढ़ाने वाले भोग अर्थात अन्नकूट बनाने की रेसिपी

जैसा की ऊपर बताया गया है की गोवर्धन पूजा के दिन ठाकुर जी को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है आइये जानते हैं कैसे बनाया जाता है अन्नकूट

आवश्यक सामग्री- 

(a) आलू -  2 (b) बैगन - 2-3  (c) फूल गोभी -  1 (d) सेम - 100 ग्राम (e) सैगरी - 100 ग्राम (f) गाजर - 1 (g) मूली - 1 (h) टिन्डे - 2 (i) अरबी - 1 (j) भिंडी - 6 से 7 (k) परवल - 2 से 3 (l) शिमला मिर्च - 1 (m) लौकी - कटी हुई (n) कच्चा केला - 1 (o) कद्दू - छोटा सा टुकड़ा (p) टमाटर - 4 से 5

आवश्यक मसाले 

(a) अदरक - 2 इंच लंबा टुकड़ा (b) हरी मिर्च - 2-3 (c) हरी मैथी - कटी हुई एक छोटी कटोरी (d) तेल - 3-4 टेबल स्पून (e) हींग - 2-3 पिंच (f) जीरा - एक छोटी चम्मच (g) हल्दी पाउडर - एक छोटी चम्मच (h) धनियां पाउडर - 2 छोटी चम्मच (i) लाल मिर्च - 3/4 छोटी चम्मच (j) अमचूर पाउडर - आधा छोटी चम्मच (k) गरम मसाला - आधा - एक छोटी चम्मच (l) नमक - 1/2 छोटी चम्मच (स्वादानुसार) (m) हरा धनियां - 100 ग्राम (बारीक कटा हुआ एक प्याली)

अन्नकूट की सब्जी बनाने की विधि

(अ) अगर आपने आवश्यक सामग्री इकठ्ठा कर ली है तो सबसे पहले आप ऊपर दी गयी सभी सब्जियों को ढंग से धो ले. इसके बाद आलू, बैगन और केले को छीलकर न ज्यादा छोटे और न ज्यादा बड़े आकार अर्थात माध्यम आकार में काट लें। इन्ही कटी हुई सब्जियों के ऊपर मूली के पत्ते भी बारीक काटकर डाल दें और फिर हरी मिर्च, हरा धनिया और और टमाटर छोटे छोटे टुकडो में काट ले और कद्दूकस किया हुआ अदरक भी डाल दें।
(ब) अब सब्जी बनाने की प्रारंभिक तयारी पूरी कर चुके हैं अब सबसे पहले एक बड़ी कढ़ाई को गैस या स्टोव में तेल गरम करें उसमें हींग और जीरा डाल दें। जब जीरा भुन जाये तो उसमे पीसी हल्दी और धनियां पाउडर डालकर उसे हल्का सा भुन ले फिर उसमें हरी मिर्च, अदरक डालकर इस मसाले को थोड़ा सा भून लें। अब इस मसाले में सभी कटी हुई सब्जियां डाल दें. फिर स्वादानुसार नमक और लाल मिर्च दें और धीरे धीरे सब्जी को चलाते रहें जिससे सब्जी जले ना। अब चार पांच मिनट के बाद सब्जी में एक कप पानी डालकर फिर से एक बार सब्जी चला दें अब उसे ढककर पहले तेज गैस पर उबाल आने तक पकाएं फिर उबाल आने के बाद सब्जी को धीमी गैस पर पकने दें।
(स) 5 मिनट बाद सब्जी को एक बार फिर से हिला से जिससे की सब्जी नीचे से जले नहीं और उसमे पानी अच्छी तरह से समा जाये. अब उसे फिर से 5 मिनट तक ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर रख दें। जब सब्जियां नरम हो जाएँ तो उसमे कटे हुए टमाटर डाल दें और गरम मसाला, अमचूर पाउडर और हरा धनिया मिलाएं और फिर से 5 मिनट के लिए धीमी आंच पर रख दें। अब आपका अन्नकूट भोग बनकर तैयार हो चुका है इसे आप पहले भगवान को भोग लगायें और फिर पुरे परिवार के साथ सब्जी की तरह से पूड़ी या रोटी के साथ खाए.

गोवर्धन पूजा की कथा या मनाये जाने के पीछे की वजह

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के ब्रजनगरी में प्रति वर्ष देवराज इंद्र की पूजा की जाती थी। भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया की इंद्रा देव के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की ही पूजा करो क्योकि गोवर्धन पर्वत की वजह से ही ब्रज का भरण पोषण होता है और बारिश का भी मुख्य कारण गोवर्धन पर्वत ही है। ब्रज के सभी लोग भगवान श्रीकृष्ण में श्रध्दा रखते थे इसलिए उन्होंने भगवान के कहे अनुसार पकवान बनाए और गोवर्धन जी को भोग लगाया। इससे गोवर्धन गिरिराज प्रसन्न हुए और सभी ब्रजवासियों को आशीर्वाद दिया। पर इससे देवराज इंद्र कुपित हो गए और अपने मेघों को आज्ञा दी कि वे गोकुल में जाकर बारिश कर पूरे गांव को नष्ट कर दें। देवराज के आदेश से मेघों ने ब्रज में बहुत जोर से बरसात शुरू कर दी और लोगो के घरों में पानी भरने लगा इससे सभी ब्रजवासी भयभीत हो गए। यह देखकर भगवान कृष्णा ने सभी लोगों से  गोवर्धन पर्वत की शरण में चलने को कहा। लोग जब वह पहुचे तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी सबसे छोटी ऊँगली अर्थात कनिष्ठा ऊँगली से गोवर्धन पर्वत उठा लिया और लगातार 7 दिन तक उसे अपने ऊँगली पर ही उठाये रखा ऐसा करके देवराज इंद्रा के मेघों से लोगो कीरक्षा की। उसी दिन से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई और ठाकुर जी को अन्नकूट 56 भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है। इस दिन अगर आप गाय माता को स्‍नान कराकर उनका श्रृंगार करके उन्हें मिठाई खिलाकर उनकी आरती और उनकी सेवा करते हैं तो और भी पूण्य के भागीदारी होते हैं

आपको गोवर्धन पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

(अ) गोवर्धन पर्वत की स्थापना, गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन बंद कमरे में न करें.
(आ) गौ पूजा करते हुए ईष्टदेव या भगवान कृष्ण की पूजा भी करें
(इ) गोवर्धन पूजा के दिन सुबह सुबह नहा ले और स्वच्छ कपडे ग्रहण करें
(ई) परिवार के सभी लोग एक साथ पूजा करें अलग अलग पूजा न करें
(उ) काले रंग के वस्त्र न पहनकर रंग बिरंगे या सफ़ेद कपडे पहने
(ऊ) गाय की सेवा जरुर करें
(ऋ) परिक्रमा कभी भी अधूरी न छोड़े
(ए) अन्नकूट बनाने में या खाने में प्याज या लहसुन का प्रयोग न करें

अन्नकूट की पूजा किस प्रकार की जाती है?

किस प्रकार करें गोवर्धन पूजा ?
(अ) सुबह सुबह उठकर शारीर पर तेल मलकर स्नान करें
(आ) घर के दरवाजे के पास गाय के गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाएं पर ध्यान रखें केवल गाय के गोबर का ही प्रयोग करें भैंस के गोबर का बिलकुल नहीं
(इ) गोवर्धन पर्वत के पास में ग्वाल बाल, पेड़ पौधों की आकृति बनाएं
(उ) मध्य में भगवान् कृष्ण की मूर्ति रख दें
(ए) भगवान् श्रीकृष्ण की, उनके ग्वाल-बाल और गोवर्धन पर्वत का षोडशोपचार पूजन करें
(ऐ) अन्नकूट, फल और पंचामृत का भोग लगाएं
(ओ) गोवर्धन पूजा की कथा सुनें. प्रसाद वितरण करें और सबके साथ भोजन करें
(औ) वेदों के अनुसार इस दिन वरुण, इंद्र, और अग्नि की पूजा की जाती है
(अं) गायों का श्रृंगार करके उनकी आरती की जाती है और उन्हें फल मिठाइयां और स्वादिष्ट पकवान खिलाई जाती हैं
(अ:) गौ माता के गोबर से ही गोवर्धन पर्वत की प्रतिकृति बनाये और उसकी फूल, धुप और नैवेद्य से उपासना करें

1 comment:

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