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मकर संक्रान्ति

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Makar Sankranti
मकर संक्रान्ति हिन्दू धर्म में एक प्रमुख त्योहार है यह वर्ष में आने वाली 12 संक्रांतियों में से सबसे अधिक महत्व रखती है। यह त्योहार हर वर्ष जनवरी के महीने में लगभग पूरे भारत वर्ष में अलग अलग प्रकार से मनाया जाता है। इस दिन से उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता है। जिससे इस दिन को ग्रीष्म ऋतु का प्रारम्भ माना जा सकता है। वही दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु में इसे पोंगल के रूप में धूम धाम से मनाया जाता है जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं। जब ठंडी का मौसम समाप्त होने लगता है तो सूर्य मकर रेखा से होते हुए उत्तर दिशा की ओर अभिमुख हो जाता है। इसीलिए भारत के कई राज्यों में मकर संक्रान्ति को उत्तरायणी भी कहते हैं। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। ऐसा माना जाता है कि दक्षिणायण को देवताओ की रात्रि और उत्तरायण को देवताओं का दिन होता हैं और क्योंकि रात्रि में देवता विश्राम करते हैं इसलिए शादी विवाह जैसे शुभ काम नहीं किये जाते। और सूर्य के उत्तरायण होने पर अर्थात देवताओ के दिन के समय पूजा पाठ, जप, तप, दान, स्नान करने से देवता प्रसन्न होते हैं।
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मकर संक्रान्ति का महत्व

मकर संक्रांति को स्नान और दान का त्योहार भी कहते है। इस दिन सूर्य भगवान की पूजा उपासना करते हैं। भारत उत्तरी गोलार्ध में है इसलिए उत्तरायणी से रातें घटने और दिन बढ़ने लगता है जिसे अंधकार से प्रकाश की ओर हुआ परिवर्तन के रूप में भी माना जाता है। क्योंकि प्रथ्वी पर सूर्य ही उर्जा का स्रोत है इसलिए त्योहार का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसी धारणा है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। क्योंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है। इस त्योहार का महत्व महाभारत काल की उस घटना से भी पता चलता है जब भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति का ही चयन किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा माता भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।

उत्तर भारत में कई राज्यों में इसे खिचड़ी भी बुलाते हैं और इस दिन दाल और चावल की खिचड़ी हर घर में बनती है और बड़ी प्रसन्नता के साथ मनाई जाता है। कई जगह गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने भी खाई जाती है। इसेक अलावा तिल और गुड़ का भी मकर संक्राति पर बेहद महत्व है। लोग इस दिन प्रातः काल में उठकर तिल के उबटन लगाते हैं और तत्पश्चात स्नान करते हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य पारम्परिक व्यंजन बनाने का भी भी प्रचलन है।

मकर संक्रान्ति - पतंगों का त्योहार

वैसे तो अलग अलग राज्यों में इसे अलग और अनूठे तरीको से हर्षपूर्वक मनाते हैं पर पतंग उडाना भी इस त्योहार को अलग बनाता है। इस दिन लोग अपनी छतो पर या खुले स्थान पर जाकर पतंग उड़ाते हैं आनन्द मनाते हैं। कई स्थानों पर पतंगबाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं। और लोग पतंगबाजी के त्योहार में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। इस दिन आकाश पतंगों से भर जाता है। बच्चे विशेषतः इस पतंगबाजी के त्योहार में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

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