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एकादशी माँ की आरती

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एकादशी एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है 11| एकादशी हर कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के ग्यारहवें दिन आती है| इस प्रकार हर माह में 2 एकादशी व्रत आते हैं और इस गणना से साल भर में 24 एकादशी आते हैं और ये सभी एकादशियाँ हिन्दू धर्म में बहुत शुभ मानी जाती है| पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। इन एकादशियों के नाम है कामदा एकादशी, वरूथिनी एकादशी, मोहिनी एकादशी, अपरा एकादशी, निर्जला एकादशी, योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी, कामिका एकादशी, पुत्रदा एकादशी, अजा एकादशी, परिवर्तिनी एकादशी, इंदिरा एकादशी,  पापांकुशा एकादशी, रमा एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी, उत्पन्ना एकादशी, मोक्षदा एकादशी, सफला एकादशी, पुत्रदा एकादशी, षटतिला एकादशी, जया एकादशी, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी, पापमोचिनी एकादशी, पद्मिनी एकादशी और परमा एकादशी। ऐसी मान्यता है की माता एकादशी की आराधना करने से जीवन मैं सुख समृद्धि, दया भाव, आदर, प्रेम, आदि भावो की अधिकता बढ़ती है। माँ एकादशी का अंचल पकड़ने वाला यानि की उनकी पूजा रचना करने वाला और आरती करने वाला कोई भी व्यक्ति कभी निराश नहीं हुआ है।  शास्त्रों के अनुसार सतयुग में इसी एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के शरीर से एक देवी का जन्म हुआ था। उस देवी ने भगवान विष्णु के प्राण बचाए थे जिससे प्रसन्न होकर श्री विष्णु जी ने इन्हें एकादशी नाम दिया।

एकादशी माता की आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी...॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी...॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी...॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी...॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी...॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी...॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी...॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी...॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी...॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी...॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी...॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी...॥

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