Home Top Ad

गुरुवार- बृहस्पतिवार (बृहस्पति देव) आरती

Share:
ग्रह गुरु को धन का कारक माना गया है| ऐसा माना जाता है की जो बृहस्पति देव को प्रसन्न रखता है उसे कभी धन धन्य की कमी नहीं रहती और उसके सारे काम शीघ्रता से सफलतापूर्वक संपन्न हो जाते हैं| ब्रहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए लोग गुरुवार का व्रत भी रखते हैं और उनकी विधिपूर्वक पूजा आरती भी करते हैं| हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार ब्रहस्पति गृह धन, पुत्र, विद्या तथा मनवांछित फलों की प्रदान करते हैं। परिवार को सुख शान्ति मिलती है।

भगवान ब्रहस्पति देव की आरती 

ऊँ जय बृहस्पति देवा, जय बृहस्पति देवा।
छिन छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तुम पूर्ण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता।
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े।
प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्वार खड़े॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी।
पाप दोष सब हर्ता, भव बन्धन हारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

सकल मनोरथ दायक, सब संशय तारो।
विषय विकार मिटाओ, सन्तन सुखकारी॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

जो कोई आरती तेरी प्रेम सहित गावे।
जेष्टानन्द बन्द सो सो निश्चय पावे॥
ऊँ जय बृहस्पति देवा॥

No comments