Home Top Ad

बृहस्पति देव की आरती - ऊँ जय बृहस्पति देवा

Share:
बृहस्पति गृह हमारे जीवन में ज्ञान और सफलता का सूचक माना जाता है| हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की ब्रहस्पति देव जिस पर भी प्रसन्न होते हैं उसके भाग्य में बस सफलता ही सफलता आती है और सारे कष्ट और दुःख उसके जीवन से दूर चले जाते हैं| इसीलिए हिन्दू धर्म में भक्त बृहस्पति देव के लिए व्रत और पूजा भी करते हैं| नीचे बृहस्पति देव की आरती लिखी गयी है| इस आरती को प्रतिदिन करना चाहिए और ब्रहस्पतिवार को तो मुख्यतः जो ब्रहस्पति भगवान का व्रत रखते हैं उन्हें तो वृहस्पति देव की इस आरती का उच्चारण करना ही चाहिए| पर याद रहे की आरती करते समय ब्रहस्पति देव का ध्यान दिल में हमेशा रखे

जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा,
छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा,
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी,
जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ||
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता,
सकल मनोरथ दायक, कृपा करो, भर्ता ||
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े,

प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ||
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी,
पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ||
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो,
विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ||
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे,
जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय पावे,
ऊँ जय वृहस्पति देवा ||

No comments